सुबह की चाय के साथ आप फोन पर खबरें पढ़ लेते हैं, दूर से रिश्तेदार का चेहरा पहचान लेते हैं और गाड़ी चलाने में भी कोई दिक्कत नहीं होती। ऐसे में अगर आपको डायबिटीज़ है, तो मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है: "जब नजर बिल्कुल साफ है, तो आंखें जंचवाने की क्या जरूरत?"
लेकिन डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) अपनी शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई लक्षण नहीं देती। न दर्द होता है, न धुंधलापन। आंख के पर्दे (रेटिना) में बदलाव शुरू हो चुके हों, तब भी नजर ठीक बनी रह सकती है। इसीलिए diabetic eye checkup लक्षणों के भरोसे नहीं, एक तय समय-सारणी के अनुसार कराना चाहिए।
इस लेख में हम सरल भाषा में बताएंगे कि diabetes में आंखों की जांच कब शुरू करें, कितने अंतराल पर दोहराएं, जांच में कौन-से टेस्ट होते हैं, किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए और किन लक्षणों में इंतजार नहीं करना चाहिए।
हां, यह संभव है। लंबे समय तक ब्लड शुगर ज्यादा रहने पर रेटिना की बहुत छोटी रक्त-वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं। कभी वे सूजकर तरल रिसने लगती हैं, तो कभी बंद हो जाती हैं। इसी स्थिति को diabetic retinopathy कहते हैं।
रेटिना आंख का वह पर्दा है जो रोशनी को संकेतों में बदलकर दिमाग तक पहुंचाता है। शुरुआती बदलाव अक्सर रेटिना के छोटे या किनारे वाले हिस्सों में होते हैं, जबकि सीधा देखने वाला केंद्रीय हिस्सा (macula) ठीक रहता है। इसलिए पढ़ने या पहचानने में कोई फर्क महसूस नहीं होता।
बीमारी बढ़ने पर ये स्थितियां बन सकती हैं:
इसलिए साफ नजर का मतलब यह नहीं कि रेटिना स्वस्थ है। चश्मे के नंबर की जांच बताती है कि आप कितना देख पा रहे हैं, रेटिना की सेहत नहीं। उसके लिए पुतली फैलाकर (dilated) रेटिना की जांच जरूरी है।
यह भी सच है कि हर मरीज को retinopathy नहीं होती। पर पहले से यह तय नहीं किया जा सकता कि किसे होगी, इसलिए हर मरीज को एक उचित screening plan अपनाना चाहिए।
डायबिटीज़ का असर रेटिना तक सीमित नहीं रहता। यह मोतियाबिंद को कम उम्र में विकसित कर सकती है और काला मोतिया (glaucoma) से भी जुड़ी हो सकती है। इसलिए रेटिना के साथ पूरी आंख की व्यापक जांच फायदेमंद रहती है।
पहली जांच का समय diabetes के प्रकार पर निर्भर करता है। यहां दी गई बातें American Diabetes Association (ADA) और American Academy of Ophthalmology (AAO) की मार्गदर्शिकाओं पर आधारित हैं।
निदान के समय ही। Type 2 diabetes कई बार सालों तक चुपचाप चलती रहती है, इसलिए पता चलने तक retinopathy पहले से मौजूद हो सकती है। "पहले शुगर कंट्रोल कर लूं, फिर आंखें दिखाऊंगा" वाला इंतजार ठीक नहीं है।
Type 1 या Type 2 diabetes वाली महिला को गर्भधारण की योजना के समय, या गर्भावस्था की पहली तिमाही में आंखों की जांच करानी चाहिए। गर्भावस्था में retinopathy बढ़ने का जोखिम रहता है। इसलिए रेटिना की स्थिति के अनुसार डॉक्टर हर तिमाही और प्रसव के बाद लगभग एक साल तक फॉलो-अप सुझा सकते हैं।
गर्भावस्था में नई शुरू हुई gestational diabetes में आमतौर पर आंखों की अलग से जांच जरूरी नहीं मानी जाती, क्योंकि इसमें गर्भावस्था के दौरान retinopathy का जोखिम बढ़ा हुआ नहीं दिखता। फिर भी नजर में कोई बदलाव हो, या प्रसव के बाद भी शुगर बनी रहे और Type 2 diabetes की पुष्टि हो, तो डॉक्टर की सलाह से Type 2 जैसी जांच-योजना अपनानी चाहिए।
ध्यान दें: लक्षण, पहले से मौजूद रेटिना की बीमारी, गर्भावस्था या कोई और चिंता हो, तो जांच तय समय से पहले कराई जानी चाहिए।
नीचे की तालिका सामान्य मार्गदर्शन देती है। आपके लिए सही अंतराल आपका नेत्र रोग विशेषज्ञ रेटिना की स्थिति देखकर तय करेगा।
| मरीज की स्थिति | जांच का सुझाया समय | ध्यान रखने की बात |
|---|---|---|
| नया निदान हुआ Type 2 diabetes | निदान के समय पहली dilated जांच | अगला अंतराल पहली जांच के नतीजे पर निर्भर करता है |
| Type 1 diabetes, पहली जांच का समय नजदीक | वयस्कों में शुरू होने के लगभग 5 साल बाद; बच्चों में puberty के आसपास | लक्षण न हों, तब भी जांच कराएं |
| रेटिना सामान्य और शुगर नियंत्रण अच्छा | आमतौर पर साल में एक बार; चुनिंदा मरीजों में 1–2 साल | लंबा अंतराल तभी, जब नेत्र रोग विशेषज्ञ उचित मानें |
| शुगर नियंत्रण खराब या अतिरिक्त जोखिम (हाई बीपी, किडनी की बीमारी आदि) | आमतौर पर साल में कम से कम एक बार, या डॉक्टर के बताए छोटे अंतराल पर | इन मरीजों में 1–2 साल का अंतराल आम तौर पर उचित नहीं |
| Diabetic retinopathy का निदान हो चुका है | कम से कम साल में एक बार; गंभीरता के अनुसार कुछ महीनों में, गंभीर अवस्था में कई बार हर 1–3 महीने | अंतराल बीमारी की अवस्था और macula की स्थिति पर निर्भर |
| आंखों का इलाज चल रहा है (injection, laser आदि) | रेटिना विशेषज्ञ के तय किए गए अंतराल पर, अक्सर कुछ हफ्तों से कुछ महीनों में | निर्धारित फॉलो-अप न छोड़ें |
| पहले से diabetes वाली गर्भवती महिला | गर्भधारण से पहले या पहली तिमाही में; फिर रेटिना के अनुसार हर तिमाही और प्रसव के बाद लगभग 1 साल तक | प्रेग्नेंसी में रेटिनोपैथी बढ़ सकती है |
साल में एक बार जांच सबसे आम सिफारिश है। जिन मरीजों की एक या अधिक जांचों में रेटिना सामान्य रही हो और शुगर नियंत्रण अच्छा हो, उनमें ADA जैसी संस्थाएं 1–2 साल के अंतराल पर विचार करने की बात कहती हैं, लेकिन यह हर मरीज के लिए नहीं है। सबके लिए एक ही अंतराल मान लेना सुरक्षित नहीं है।
हर मरीज को सभी टेस्ट की जरूरत नहीं होती। कौन-सी जांच होगी, यह आपके लक्षणों और डॉक्टर की जांच के नतीजों पर निर्भर करता है।
इसमें चार्ट पर अक्षर पढ़वाकर देखा जाता है कि आप कितना साफ देख पा रहे हैं। यह जरूरी है, पर इससे रेटिना की हालत नहीं पता चलती।
आंखों में drops डालकर पुतली (pupil) को फैलाया जाता है, ताकि डॉक्टर रेटिना और ऑप्टिक नर्व को ठीक से देख सकें। diabetic eye checkup का यह सबसे अहम हिस्सा है। drops के बाद कुछ घंटों तक धुंधलापन और तेज रोशनी से परेशानी हो सकती है, इसलिए किसी को साथ लाना बेहतर है और जांच के तुरंत बाद खुद गाड़ी चलाने से बचें।
इसमें रेटिना की तस्वीर ली जाती है। इससे बदलावों का रिकॉर्ड रहता है और अगली जांच में तुलना आसान होती है। ADA के अनुसार retinal photographs screening में मदद कर सकती हैं, पर वे योग्य विशेषज्ञ की comprehensive dilated जांच का विकल्प नहीं हैं।
यह रेटिना की परतों की बारीक cross-section तस्वीर देने वाली जांच है। जब macula में सूजन का शक हो या सूजन पहले से पता हो, तब इससे उसकी स्थिति और इलाज के असर का आकलन करने में मदद मिलती है। यह हर diabetic मरीज के लिए अनिवार्य नहीं है।
कुछ चुनिंदा मामलों में फ्लोरेसीन एंजियोग्राफी (FFA) जैसी जांच सुझाई जा सकती है। इसमें रेटिना की रक्त-वाहिकाओं में रिसाव या रुकावट देखी जाती है। अभिनव दृष्टि आई हॉस्पिटल की डायग्नोस्टिक सुविधाओं की सूची में FFA भी शामिल है। यह जांच भी हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होती।
याद रखें, सिर्फ चश्मे का नंबर चेक करवा लेना diabetic retinopathy screening नहीं है। व्यापक जांच में आमतौर पर क्या-क्या देखा जाता है, यह हमारे विश्व दृष्टि दिवस वाले लेख में भी समझाया गया है।
कुछ स्थितियां diabetic eye disease की संभावना बढ़ा सकती हैं या जांच के अंतराल को छोटा करवा सकती हैं:
इनमें से कोई एक कारण यह तय नहीं करता कि रेटिना को नुकसान होगा ही। बस इतना है कि ऐसे में डॉक्टर से अपनी स्थिति के हिसाब से अंतराल पूछ लेना समझदारी है।
शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई लक्षण नहीं होता। बीमारी बढ़ने पर ये संकेत दिख सकते हैं:
इसलिए लक्षणों के आने का इंतजार न करें। जांच तय समय पर कराएं।
इन स्थितियों में routine appointment का इंतजार न करें, उसी दिन नेत्र रोग विशेषज्ञ से मिलें: अचानक नजर कम होना, floaters का अचानक बढ़ जाना, आंख के सामने बिजली जैसी चमक (flashes) दिखना, या पर्दा-सा गिरता महसूस होना।
अच्छा नियंत्रण जोखिम घटाने और बीमारी को धीमा करने में मदद करता है। इसमें ये बातें शामिल हैं:
लेकिन अच्छा नियंत्रण यह गारंटी नहीं देता कि retinopathy कभी नहीं होगी। इसलिए शुगर ठीक रहने पर भी नियमित screening जरूरी है।
इलाज बीमारी के चरण और गंभीरता पर निर्भर करता है। हर मरीज को injection, laser या सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती।
किसे क्या चाहिए, यह रेटिना विशेषज्ञ की जांच से तय होता है। अभिनव दृष्टि की Retina सेवाओं में medical retina (injections), laser और diabetic vitrectomy जैसी सेवाएं सूचीबद्ध हैं। इलाज शुरू होने के बाद फॉलो-अप समय पर कराना उतना ही जरूरी है।
अस्पताल चुनते समय ये बातें देखें:
Abhinav Drishti Eye Hospital, महानगर, लखनऊ में आप diabetes से जुड़ी आंखों की जांच और देखभाल के बारे में पूछताछ कर सकते हैं। अस्पताल की डॉक्टर टीम में विट्रियो-रेटिनल सर्जन भी शामिल हैं। अस्पताल के अनुसार सभी सुविधाएं ग्राउंड फ्लोर पर हैं, जो बुजुर्ग मरीजों के लिए सुविधाजनक हो सकता है। आपके लिए कौन-सी जांच सही रहेगी, यह परामर्श के दौरान डॉक्टर तय करेंगे।
साफ नजर का मतलब हमेशा स्वस्थ रेटिना नहीं होता। diabetic retinopathy शुरुआत में चुपचाप बढ़ सकती है, और जब तक लक्षण दिखें, तब तक बीमारी आगे बढ़ चुकी हो सकती है। इसलिए जांच का समय लक्षणों से नहीं, अपने diabetes के प्रकार और डॉक्टर की सलाह से तय होना चाहिए।
याद रखने की बातें: Type 2 में निदान के समय, Type 1 में सिफारिश के अनुसार पहली जांच कराएं। उसके बाद सही अंतराल पर लौटें। रेटिना में बदलाव, गर्भावस्था या कोई लक्षण हो, तो जल्दी जांच कराएं।
अगर आपका diabetic eye checkup बाकी है, Abhinav Drishti Eye Hospital (B-719, सेक्टर-C, महानगर) में सोमवार से शनिवार, सुबह 9:30 से दोपहर 1:30 बजे का समय वेबसाइट पर दिया गया है। आने से पहले +91 9415006044 पर समय की पुष्टि कर लें और अपनी पिछली आंखों की रिपोर्ट, HbA1c रिपोर्ट और दवाओं की सूची साथ लाएं।
यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी के लिए है और किसी योग्य डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी स्थिति के अनुसार निर्णय के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।